बंगाल में बिछड़े बच्चों से 7 साल बाद मिले पिता:असम से झारखंड लौटने के दौरान स्टेशन पर बिछड़ गए थे पैरेंट्स से 5 बच्चे, पिता ने कहा- आज दोबारा मुझे पूरा संसार मिल गया

 7 साल बाद बिछड़े बच्चों का अचानक सामने आना... पिता के आंखों से खुशी के आंसू का बहना... कभी किसी बच्चे को गले से लगाना तो कभी खुशी से उनके सिर को चूम लेना। यह दृश्य मंगलवार को गुमला चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के ऑफिस में तब दिखा, जब 7 साल पहले बंगाल के एक स्टेशन पर बिछड़े बच्चों से उनके पिता मिले। बच्चों के गुम होने के गम में मां ने 2015 में दम तोड़ दिया था। पर पिता ने हिम्मत नहीं हारी और ढूंढ़ते हुए आज वो अपने बच्चों से मिले। इस खुशी के माहौल में भावुक पिता ने कहा "मेरा प्यार जीत गया। अब उन्हें उनका पूरा संसार मिल गया है। मेरी पत्नी आज जिंदा होती तो बच्चों से मिलकर फूले न समाती।"

सभी बच्चों से हुई मुलाकात

2014 में बिलांबर सिंह उर्फ रवि तिर्की अपने 5 बच्चों से बंगाल के एक स्टेशन पर बिछड़ गए थे। मंगलवार को पांचों बच्चे जुलीन (21), जसिंता (17), प्रियंका (14), प्रकाश (9) और भीम (8) की गुमला के CWC के ऑफिस में पिता से मुलाकात हुई। CWC की सदस्य सुषमा साहू ने बताया कि सभी बच्चों की काउंसिलिंग की जाएगी। फिर बच्चों को पिता को सौंपा जाएगा। इसके बाद बच्चों के पिता वापस अपने गांव गुमला स्थित रायडीह थाना क्षेत्र के सैमरटोली कोंडरा लौट

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असम से गुमला आते वक्त बिछड़ गए थे बच्चे

सुबह 11 बजे CWC ऑफिस पहुंचे बिलांबर बताते हैं कि वो अपनी पत्नी मोनी देवी के साथ असम के चाय बगान में काम करते थे। उन्हें तारीख ठीक से याद नहीं पर 2014 में योजना बनाई कि बच्चों को एक बार अपने गुमला स्थित गांव घूमा लाए। रॉबी अपनी पत्नी और पांचों बच्चे जुलीन, जसिंता, प्रियंका, प्रकाश और भीम के साथ ट्रेन में बैठ गए।

पानी लेकर वापस आए तो नहीं थे बच्चे

बिलांबर बातचीत करते हुए भावुक हो जाते हैं और कहते हैं, स्टेशन का नाम याद नहीं पर ट्रेन के रुकते ही वे अपनी पत्नी और बच्चों के साथ वहां उतर गए। बच्चों को प्लेटफॉर्म पर बैठा खुद पत्नी के साथ पानी लेने नल की ओर चले गए। जब पानी लेकर वापस आए तो बच्चे वहां नहीं मिले।

बच्चों को ढूंढ़ने के दौरान उनकी मां भी गुम हो गई

बिलांबर बताते हैं कि एक वो दिन था और एक आज। तब से बच्चों को ढूंढ़ने के लिए जगह-जगह घूमते रहे। मैं असम के रूट पर हर स्टेशन और ट्रेन में तलाश करता रहा। लाेग जहां जाने कहते, वहां पहुंच जाता। सारे पैसे खत्म हो गए। इसी बीच बच्चों को ढूंढ़ने के क्रम में उनकी मां भी 2015 में पति से बिछड़ गई। बिलांबर अब अपनी पत्नी की तलाश करने लगे। पर उसका कुछ पता नहीं चला। 2020 में मोनी देवी की मां ने बिलांबर को बताया कि उसकी पत्नी की मौत हो चुकी है। बिलांबर पूरी तरह से टूट गए पर उन्होंने हार नहीं मानी। CWC की सदस्य सुषमा साहू ने बताया कि बिलां

पानी लेकर वापस आए तो नहीं थे बच्चे

बिलांबर बातचीत करते हुए भावुक हो जाते हैं और कहते हैं, स्टेशन का नाम याद नहीं पर ट्रेन के रुकते ही वे अपनी पत्नी और बच्चों के साथ वहां उतर गए। बच्चों को प्लेटफॉर्म पर बैठा खुद पत्नी के साथ पानी लेने नल की ओर चले गए। जब पानी लेकर वापस आए तो बच्चे वहां नहीं मिले।

बच्चों को ढूंढ़ने के दौरान उनकी मां भी गुम हो गई

बिलांबर बताते हैं कि एक वो दिन था और एक आज। तब से बच्चों को ढूंढ़ने के लिए जगह-जगह घूमते रहे। मैं असम के रूट पर हर स्टेशन और ट्रेन में तलाश करता रहा। लाेग जहां जाने कहते, वहां पहुंच जाता। सारे पैसे खत्म हो गए। इसी बीच बच्चों को ढूंढ़ने के क्रम में उनकी मां भी 2015 में पति से बिछड़ गई। बिलांबर अब अपनी पत्नी की तलाश करने लगे। पर उसका कुछ पता नहीं चला। 2020 में मोनी देवी की मां ने बिलांबर को बताया कि उसकी पत्नी की मौत हो चुकी है। बिलांबर पूरी तरह से टूट गए पर उन्होंने हार नहीं मानी। CWC की सदस्य सुषमा साहू ने बताया कि बिलांबर अपने बच्चे काे वर्षों से तलाश रहे थे



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